नवा रायपुर। श्री दावड़ा विश्वविद्यालय के कला एवं मानविकी संकाय द्वारा हिंदी दिवस के अवसर पर भव्य एवं गरिमापूर्ण साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में हिंदी भाषा एवं साहित्य के महत्व को रेखांकित करते हुए विद्यार्थियों द्वारा विविध साहित्यिक प्रस्तुतियाँ दी गईं। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में हिंदी भाषा के प्रति प्रेम, सम्मान एवं गौरव की भावना उत्पन्न करने के साथ-साथ हिंदी साहित्य की समृद्ध परंपरा से उन्हें परिचित कराना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में माननीय मामाजी श्री तुलसीदास संघानी की गरिमामयी उपस्थिति रही। उनके साथ विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति श्री वरुण गंजीर जी तथा कुलसचिव श्री विपिन श्रीवास्तव विशेष रूप से उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ विधिवत मंत्रोच्चारण के साथ किया गया।

मुख्य अतिथि श्री तुलसीदास संघानी ने हिंदी भाषा की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संवेदना और सामाजिक चेतना को अभिव्यक्त करने वाली सशक्त भाषा है। उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी के अध्ययन, लेखन एवं साहित्यिक गतिविधियों से निरंतर जुड़े रहने के लिए प्रेरित किया।

प्रतिकुलपति श्री वरुण गंजीर ने अपने संबोधन में हिंदी के व्यापक स्वरूप तथा वर्तमान समय में उसकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भाषा किसी भी समाज की पहचान एवं सांस्कृतिक चेतना का आधार होती है। विद्यार्थियों को अपनी मातृभाषा एवं हिंदी भाषा के प्रति सम्मान रखते हुए उसके विकास में अपना योगदान देना चाहिए।
कुलसचिव श्री विपिन श्रीवास्तव ने हिंदी दिवस की शुभकामनाएँ देते हुए विद्यार्थियों की साहित्यिक प्रस्तुतियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन विद्यार्थियों की रचनात्मक प्रतिभा को मंच प्रदान करने के साथ-साथ उनमें आत्मविश्वास एवं अभिव्यक्ति-कौशल का विकास करते हैं।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में हिंदी विभाग के व्याख्याता श्री शिवा घृतलहरे ने मुख्य समन्वयक की भूमिका निभाई। कार्यक्रम के सफल आयोजन एवं व्यवस्थापन में डॉ. आशुतोष शर्मा का महत्वपूर्ण सहयोग रहा।
हिंदी दिवस समारोह में विद्यार्थियों ने हिंदी साहित्य के विभिन्न रचनाकारों एवं उनकी रचनाओं पर आधारित प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं। विद्यार्थियों द्वारा संत कबीर के पदों का गायन किया गया, जिसे सभी ने सराहा। इसके पश्चात् विद्यार्थियों ने प्रसिद्ध कवि नागार्जुन के जीवन, व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए उनकी कविताओं का प्रभावशाली वाचन किया।
कार्यक्रम में काका हाथरसी, ओमप्रकाश व्यास एवं हरिशंकर परसाई जैसे प्रमुख हास्य-व्यंग्यकारों के जीवन एवं साहित्यिक योगदान पर भी विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुतियाँ दी गईं। विद्यार्थियों ने हास्य एवं व्यंग्य के माध्यम से सामाजिक विसंगतियों, रूढ़ियों तथा जीवन की विभिन्न परिस्थितियों पर साहित्यकारों द्वारा की गई सार्थक अभिव्यक्ति को प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर कला एवं मानविकी संकाय के अधिष्ठाता डॉ. मनीष वर्मा ने हिंदी भाषा एवं साहित्य के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए कहा कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने का प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।
कार्यक्रम में कला एवं मानविकी संकाय के डॉ. संजू, डॉ. सारिका सिन्हा, सुश्री पीयूषा जाधव, सुश्री नीलिमा खरशन, सुश्री कशिश कृपाल यादव, डॉ. पुष्पा भारती एवं श्री मोहन मिश्रा सहित संकाय के समस्त शिक्षकगण उपस्थित रहे।
हिंदी दिवस समारोह विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता, साहित्यिक प्रस्तुतियों एवं हिंदी भाषा के प्रति उनके उत्साह के कारण अत्यंत प्रभावशाली एवं सराहनीय रहा। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को हिंदी साहित्य के महत्वपूर्ण रचनाकारों एवं उनकी रचनात्मक परंपरा से परिचित कराने के साथ-साथ हिंदी भाषा के प्रति सम्मान और गौरव की भावना को और अधिक सुदृढ़ किया।
कार्यक्रम का समापन हिंदी भाषा एवं साहित्य के प्रति सम्मान, प्रेम और समर्पण की भावना के साथ हुआ।



