*गरियाबंद–धमतरी, छत्तीसगढ़ | उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (यूएसटीआर) में पक्षी जगत से जुड़ी दो अत्यंत महत्वपूर्ण और रोमांचक घटनाएँ दर्ज की गई हैं, जो इस संरक्षित क्षेत्र के बढ़ते पारिस्थितिक महत्व और वनों के तीव्र पुनर्जीवन को रेखांकित करती हैं।
हॉर्नबिल मॉनिटरिंग में संलग्न एक दल, जिसका नेतृत्व *बीट गार्ड श्री वीरेंद्र ध्रुव* एवं *हॉर्नबिल ट्रैकर श्री देवेंद्र यादव* कर रहे थे, ने *मालाबार पाइड हॉर्नबिल को एक फलाहारी चमगादड़ (फ्रूट बैट) का शिकार करते हुए* दर्ज किया। इस प्रकार का व्यवहार अत्यंत दुर्लभ रूप से प्रलेखित हुआ है तथा यह भारत की सबसे आकर्षक हॉर्नबिल प्रजातियों में से एक की अवसरवादी भोजन प्रवृत्ति और व्यवहारिक अनुकूलन क्षमता पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करता है।
इससे भी अधिक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में दल ने रिजर्व क्षेत्र में *भारतीय पिट्टा (Pitta brachyura) के एक किशोर (जुवेनाइल) पक्षी* का फोटोग्राफ प्राप्त किया। परंपरागत रूप से भारतीय पिट्टा के प्रजनन क्षेत्र को मुख्यतः हिमालय की तराई एवं उससे लगे क्षेत्रों तक सीमित माना जाता रहा है। यूएसटीआर में किशोर पक्षी की उपस्थिति इस बात का प्रबल संकेत देती है कि इस प्रजाति ने संभवतः स्थानीय स्तर पर अथवा आसपास के परिदृश्य में प्रजनन किया है। यह अवलोकन भारतीय पिट्टा के प्रजनन वितरण में संभावित विस्तार अथवा परिवर्तन की ओर संकेत करता है।

यह खोज इस तथ्य को रेखांकित करती है कि *उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के मध्य भारतीय वन भारतीय पिट्टा के संभावित प्रजनन आवास के रूप में उभर रहे हैं*, जिससे पक्षी विज्ञान अनुसंधान और दीर्घकालिक निगरानी के नए अवसर खुलते हैं।
ये अवलोकन पिछले चार वर्षों में किए गए गहन संरक्षण और आवास पुनर्स्थापन कार्यों के परिणामस्वरूप वनों में हो रहे उत्साहजनक पुनरुत्थान को भी प्रतिबिंबित करते हैं। यूएसटीआर द्वारा *वन संरक्षण, शिकारी विरोधी अभियान, आवास पुनर्स्थापन तथा बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाने* का अभूतपूर्व कार्यक्रम संचालित किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप पूर्व में क्षतिग्रस्त, अतिक्रमित और शिकार प्रभावित वन क्षेत्रों का पुनर्जनन हुआ है। सुदृढ़ क्षेत्रीय संरक्षण एवं पारिस्थितिक पुनर्स्थापन ने अनेक संवेदनशील वन्यजीव प्रजातियों को पुनः इन वनों में लौटने का अवसर प्रदान किया है।

*रायपुर से मात्र 130 किलोमीटर (लगभग ढाई घंटे की सड़क यात्रा)* की दूरी पर स्थित उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व तेजी से मध्य भारत के सबसे महत्वपूर्ण *बर्डिंग एवं वन्यजीव पर्यटन स्थलों* में से एक के रूप में उभर रहा है। समृद्ध पक्षी विविधता के अतिरिक्त यह रिजर्व पर्यटकों को *भारतीय विशाल गिलहरी (Indian Giant Squirrel)* तथा *दुर्लभ भारतीय विशाल उड़न गिलहरी (Indian Giant Flying Squirrel)* के नियमित दर्शन का अवसर भी प्रदान करता है। यहाँ *मालाबार पाइड हॉर्नबिल, भारतीय पिट्टा, ब्राउन फिश आउल, ग्रे-हेडेड फिश ईगल, विभिन्न कठफोड़वा, बार्बेट, मिनिवेट तथा अनेक प्रवासी एवं स्थानीय पक्षी प्रजातियाँ* पाई जाती हैं। इसके अलावा यह क्षेत्र स्तनधारियों और अन्य वन्यजीवों की समृद्ध विविधता का भी आश्रयस्थल है।
ये नवीन अभिलेख पुनः सिद्ध करते हैं कि *जब वनों को संरक्षण और पुनर्जीवन का अवसर दिया जाता है, तो वन्यजीव आश्चर्यजनक गति से सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हैं।* उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की पुनरुत्थान गाथा इसे मध्य भारत के एक महत्वपूर्ण संरक्षण एवं पक्षी अवलोकन परिदृश्य के रूप में स्थापित कर रही है।




