धमतरी में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा पर्व 16 जुलाई को बड़े धूमधाम से मनाया गया।श्री जगदीश मंदिर से रथ यात्रा निकलकर शहर को भ्रमण करते हुए राष्ट्रीय गौशाला जनकपुर में पहुंचे।जहां पर भगवान जगन्नाथ बलभद्र भैया और सुभद्रा मैया 11 दिनों तक जनकपुर में विश्राम हुआ। 11 दिन बाद भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की वापसी हुई जोकि राष्ट्रीय गौशाला से निकलकर रामबाग गणेश चौक सदर बाजार कचहरी चौक मठ मंदिर चौक गोल बाजार बालक चौक घड़ी चौक होते हुए सिहावा चौक पहुंची सिहावा चौक से वापस घड़ी चौक होते हुए भगवान जगन्नाथ की रथ श्री जगदीश मंदिर पहुंची।रथ वापसी के दौरान रास्ते भर भक्तों को गजमुंग की प्रसादी का वितरण किया गया वहीं श्री जगदीश मंदिर में भगवान जगन्नाथ को विधि विधान के साथ गर्भगृह में स्थापित किया गया।रथ में वापसी में भगवान जगन्नाथ के दर्शन के लिए भक्तों का डाटा लगा रहा कहीं भगवान जगन्नाथ के आने की खुशी में महिलों ने सड़क पर रंगोली बनाया। तो कही रास्ते में जगह जगह फूलों की वर्षा की गई।साथ ही भक्तो ने जगह जगह भगवान जगन्नाथ की पूजा अर्चना कर भोग लगाया। वहीं छोटे बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक ने रथ को खिंचते हुए को जगदीश मंदिर तक पहुंचाया।
श्री जगदीश मंदिर ट्रस्ट के विजय अग्रवाल,लक्ष्मी चंद किरण कुमार गांधी ने बताया भगवान जगन्नाथ अपने बलभद्र भैया और बहन सुभद्रा मैया के साथ श्री जगदीश मंदिर वापस लौटे हैं। बताया गया कि भगवान जगन्नाथ जनकपुर में 11 दिनों तक रहे और भी जगह भगवान जगन्नाथ ग्यारस को वापस लौटते हैं, लेकिन धमतरी में जगन्नाथपूरी की तर्ज पर तेरस को वापस गर्भगृह में पहुंचे हैं,और 11 दिनों तक जनकपुर में काफी उत्साह रहा।भगवान के आशीर्वाद से धमतरी और आसपास क्षेत्र में अच्छी बारिश हुई इससे भगवान का आशीर्वाद मिलेगा प्रधानमंत्री की जनता के लिए कामना की गई है।मान्यता बताते हुए कहा भगवान अस्वस्थ होने पर जब भगवान स्वस्थ होते हैं तो अपने मौसी के घर मिलने जाते है और इस परंपरा को कायम रखते हुए राष्ट्रीय गौशाला के जनकपुर में भगवान जगन्नाथ 11 दिन तक रहे ट्रस्टियों ने यह भी बताया कि भगवान जगन्नाथ भगवान गर्भग्रह में जाते हैं बताया कि लक्ष्मी भगवान जगन्नाथ को रोक देती हैऔर रसगुल्ला खिलाते हैं उसके बाद गर्भवती में जाते हैं।
भक्तों ने बताया कि भगवान की रथ यात्रा की वापसी हुई है, जनकपुर से श्री जगदीश मंदिर गर्भग्रह में आये जिसमें काफी उत्साह देखी गई जहां पर भगवान जगन्नाथ की पुनः प्रतिष्ठा होगी,भक्तों ने बताया कि प्रभु अपने मौसी के घर गए थे जहां से वापस लौटे हैं। भक्तों के दुख सुख को ठीक करते हुए खुशहाली जीवन में आएगी,उसको देखते हुए वापस अपने गर्भ में पधारे हैं। और छोटे-छोटे बच्चे रथ को खींचने के लिए पहुंचे हैं,जो की भक्ति के आस्था को बताता है।बताया गया की वापसी के दिन भगवान की प्रसादी में मीठा मिलाया जाता है ताकि सबके मुंह मीठा हो और प्रभु अपने घर में पधारे।



