नई दिल्ली: अमेरिका की राजनीति और न्यायिक जगत में उस समय हलचल मच गई जब डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) को टैरिफ मामले में अमेरिका की सर्वोच्च अदालत (Supreme Court of the United States) से बड़ा झटका लगा। कोर्ट ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए कुछ टैरिफ आदेशों को असंवैधानिक मानते हुए रद्द कर दिया। इस फैसले के बाद भारतीय मूल के प्रसिद्ध अमेरिकी वकील नील कात्याल (Neal Katyal) सुर्खियों में आ गए हैं, जिनकी दलीलों ने अदालत को प्रभावित किया।
मामला 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत लगाए गए टैरिफ से जुड़ा था। कत्याल ने कोर्ट में तर्क दिया कि इस कानून का इस्तेमाल कर मनमाने ढंग से कर लगाना संविधान की भावना के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी संविधान के अनुसार केवल कांग्रेस को ही कर लगाने का अधिकार है, न कि राष्ट्रपति को। अदालत ने उनके तर्कों से सहमति जताते हुए टैरिफ आदेशों को निरस्त कर दिया। फैसले के बाद कत्याल ने कहा कि यह किसी एक राष्ट्रपति की हार नहीं, बल्कि शक्तियों के संतुलन और कानून के शासन की जीत है। उन्होंने इसे संविधान की मजबूती का प्रमाण बताया।
भारतीय अप्रवासी परिवार में जन्मे कत्याल 2010 में राष्ट्रपति बराक ओबामा (Barack Obama) द्वारा कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किए गए थे। वे सुप्रीम कोर्ट में 50 से अधिक मामलों में पैरवी कर चुके हैं और उन्हें 2017 और 2023 में लिटिगेटर ऑफ द ईयर भी चुना गया था। उन्हें एडमंड रैंडोल्फ पुरस्कार सहित कई सम्मान मिल चुके हैं।




