हर व्यक्ति को अपनी क्षमता के अनुसार दैनिक जीवन में भाग लेने, सीखने, खेलने और आत्मनिर्भर बनने का अधिकार है। आज भारत में 68 बच्चों में 1 बच्चा ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर से प्रभावित है। ऐसे बच्चों में बोलने-सुनने में कठिनाई, ध्यान केंद्रित करने में, खेल खेलने में, कपड़े पहनने में, पेंसिल पकड़ने में, स्वयं खाना खाने में कठिनाई हो सकती है। इन बच्चों के माता-पिता इन कठिनाइयों से हर दिन लड़ते हैं – कभी स्कूल में, कभी शादी के घर में, कभी बर्थडे पार्टी में, किसी सोशल प्रोग्राम में। पर कभी हमने उन बच्चों के भीतर हो रही तकलीफों के बारे में सोचा है, जो अपने सेंसरी इशूज / डिसऑर्डर संवेदनाओं से हर दिन लड़ रहा होता है, जो अपना नाम नहीं बता पा रहा है, अन्य बच्चों के साथ खेलकूद नहीं कर पा रहा है।
ऑक्यूपेशनल थेरेपी ऐसी ही समस्याओं में मददगार है, जैसे सीपी (सेरेब्रल पाल्सी), ऑटिज्म, एडीएचडी, लर्निंग डिसेबिलिटी, न्यूरोलॉजिकल कंडीशंस।
Pediatric OT की 5 विशेषताएं
Sensory Integration पर काम: सिर्फ भारत में OT ही प्रमाणित तरीके से Sensory Processing Disorder का इलाज करता है – जैसे बच्चे को आवाज से डर, छूने से परेशानी, झूला झूलने की लत।
Play-Based थेरेपी खेल-खेल में होती है। बच्चा समझता है खेल रहा है, पर अंदर उसका ब्रेन ट्रेन हो रहा है।
ADL – आत्मनिर्भरता लक्ष्य: आखिरी लक्ष्य है – बच्चा खुद से खाए, खुद से तैयार हो, खुद से स्कूल जाए। कोई और थेरेपी ये सीधे नहीं सिखाती।
Holistic Approach: एक ही सेशन में – हाथ का काम, दिमाग का ध्यान, सेंसरी, इमोशन और सोशल स्किल – सब कवर।
Family-Centered: माता-पिता को घर के लिए Routine, Diet, खिलौने, स्कूल स्ट्रेटेजी सिखाई जाती है।
आज 2026 में भारत में OT सुविधाएं पहले से बहुत ज्यादा बढ़ गई हैं
सरकारी अस्पताल में, AIIMS, Raipur
CDEIC सेंटर (सरकार के नए सेंटर) में 0-6 साल के बच्चों के लिए , CRC राजनांदगांव
NGO / कम्युनिटी सेंटर में
भारत मे कौन सी एडवांस थेरेपी उपलब्ध है
– Ayres Sensory Integration Therapy (USC-Certified)
– MNRI – Primitive Reflex Integration
– Hand Therapy, Neuro Rehab, Aquatic Therapy
– ADL Training – नहाना, खाना, पहनना
– Cognitive Retraining – याददाश्त, ध्यान
– School Readiness और Social Skills Group
– Tele-therapy / Home Program वीडियो के साथ
अभी भी चुनौतियां, जो हमारे सामने है
– छोटे शहरों / गांवों में OT कम हैं
– Insurance में अभी भी पूरी तरह कवर नहीं होता
– बहुत लोगों को पता ही नहीं कि OT के पास जाना है
> आइए विश्व ओटी (ऑक्यूपेशनल थेरेपी) दिवस पर हम ऐसे समाज बनाने का संकल्प लें जहाँ हर बच्चे को सोचने, खेलने और आगे बढ़ने का अवसर मिले तथा प्रत्येक व्यक्ति को आत्मनिर्भर जीवन जीने के लिए आवश्यक सहयोग प्राप्त हो।
> हर बच्चा अनमोल है, हर क्षमता महत्वपूर्ण है और हर व्यक्ति की भागीदारी मायने रखती है।
Dr. Shweta Shroti
Rajnandgaon




