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Cg News : स्व-सहायता समूहों के माध्यम से आत्मनिर्भर बन रहीं धमतरी जिले की महिलाएं

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धमतरी/ प्रतिवर्ष 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है। यह दिवस समाज में महिलाओं के योगदान, उनके अधिकारों और सशक्तिकरण को सम्मान देने का अवसर प्रदान करता है। केंद्र और छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिलाओं के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक सशक्तिकरण के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका सकारात्मक प्रभाव अब गांव-गांव तक दिखाई देने लगा है।

धमतरी जिले में भी शासन की योजनाओं और कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं को आत्मनिर्भर एवं स्वावलंबी बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी अंचलों की महिलाएं आज स्व-सहायता समूहों से जुड़कर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि परिवार और समाज में अपनी सशक्त पहचान भी बना रही हैं।

जिले में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत बड़ी संख्या में महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़ा गया है। इन समूहों के माध्यम से महिलाएं बचत और आंतरिक ऋण की व्यवस्था के साथ-साथ विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आय अर्जित कर रही हैं। कई महिला समूह खेती-किसानी के साथ सब्जी उत्पादन, मशरूम उत्पादन, कुक्कुट पालन, बकरी पालन, डेयरी व्यवसाय, मछली पालन तथा लघु उद्यमों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में महिला समूहों द्वारा जैविक खेती, सब्जी उत्पादन और पोषण वाटिका जैसी गतिविधियों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे न केवल महिलाओं की आय में वृद्धि हो रही है, बल्कि परिवार के पोषण स्तर में भी सुधार हो रहा है। शासन द्वारा प्रशिक्षण, बैंक ऋण सुविधा, विपणन सहयोग और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराकर महिलाओं को उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है।

धमतरी जिले के कई गांवों में महिला समूहों ने सामूहिक उत्पादन और विपणन की सफल पहल की है। इससे महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ा है और वे आर्थिक निर्णयों में भी सक्रिय भूमिका निभाने लगी हैं। अनेक महिला समूह स्थानीय हाट-बाजारों के साथ-साथ विभिन्न मेलों और प्रदर्शनियों में अपने उत्पादों का विक्रय कर रही हैं।

इसके अलावा शासन द्वारा महिलाओं के स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं, पोषण कार्यक्रमों और कौशल विकास प्रशिक्षणों के माध्यम से महिलाओं के समग्र विकास को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

आज धमतरी जिले की महिलाएं केवल घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि खेती, उद्यमिता, स्वयं सहायता समूहों और अन्य आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से समाज के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। शासन की योजनाओं और सामूहिक प्रयासों के परिणामस्वरूप ग्रामीण और आदिवासी अंचलों की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई मिसाल कायम कर रही हैं।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 2026 के अवसर पर यह स्पष्ट है कि जब महिलाओं को अवसर, संसाधन और प्रोत्साहन मिलता है, तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। धमतरी जिले की महिलाएं भी इसी आत्मविश्वास और संकल्प के साथ आत्मनिर्भरता की राह पर निरंतर आगे बढ़ रही हैं।

इस वर्ष महिला दिवस की थीम “दान करके लाभ प्राप्त करें” है। इसका संदेश है कि जब हम समाज में सहयोग, समर्थन और अवसर प्रदान करते हैं, तो उसका सकारात्मक लाभ पूरे समाज को मिलता है। आइए, हम सभी मिलकर सहयोग और सहभागिता की भावना के साथ लैंगिक समानता को बढ़ावा दें और महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में आगे बढ़ें।

सायरा बानो बनीं आत्मनिर्भरता की मिसाल : दिव्यांगता के बावजूद ई-रिक्शा चलाकर कमा रहीं सम्मानजनक आजीविका

धमतरी जिले की सायरा बानो ने यह साबित कर दिया है कि यदि मन में दृढ़ इच्छाशक्ति और आत्मसम्मान के साथ आगे बढ़ने का जज़्बा हो, तो कठिन से कठिन परिस्थितियाँ भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। शारीरिक दिव्यांगता और अत्यंत गरीब पारिवारिक स्थिति के बावजूद सायरा बानो आज आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बनकर उभरी हैं। कल 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस है ।
सायरा बानो पहले बेहद आर्थिक तंगी में जीवन यापन कर रही थीं। रोजगार के अभाव के कारण उनके लिए दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति करना भी एक बड़ी चुनौती बन गया था। ऐसे समय में उन्होंने हार मानने के बजाय आत्मनिर्भर बनने का संकल्प लिया और रोजगार के लिए जिला प्रशासन से मदद की अपील की।
सायरा बानो की परिस्थितियों और उनके आत्मनिर्भर बनने के जज़्बे को देखते हुए कलेक्टर श्री अविनाश मिश्रा ने उनकी समस्या को गंभीरता से लिया और उन्हें बड़ौदा आरसेटी, धमतरी में ई-रिक्शा संचालन का प्रशिक्षण दिलाने की व्यवस्था की। प्रशिक्षण के दौरान सायरा बानो ने पूरी लगन और मेहनत से ई-रिक्शा चलाने की तकनीक सीखी। इसके साथ ही उन्हें स्वरोज़गार से संबंधित आवश्यक जानकारी दी गई तथा पुलिस विभाग द्वारा यातायात नियमों की भी विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद समाज कल्याण विभाग एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के सहयोग से सक्षम प्रोजेक्ट के अंतर्गत सायरा बानो को ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया।

आज सायरा बानो धमतरी शहर में आत्मविश्वास के साथ ई-रिक्शा चलाकर अपनी आजीविका कमा रही हैं। इस कार्य से उन्हें प्रतिदिन लगभग 300 से 500 रुपये तक की आय हो रही है, जिससे वे अपने जीवन की आवश्यकताओं को सम्मानपूर्वक पूरा कर पा रही हैं।

कलेक्टर श्री अविनाश मिश्रा ने कहा कि शासन की विभिन्न योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद लोगों को आत्मनिर्भर बनाना है। उन्होंने कहा कि यदि लाभार्थी दृढ़ संकल्प और मेहनत के साथ आगे बढ़ें, तो वे अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
सायरा बानो की यह सफलता की कहानी न केवल दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणादायी है, बल्कि समाज के हर उस व्यक्ति के लिए एक संदेश है कि कठिन परिस्थितियाँ कभी भी आगे बढ़ने की राह में बाधा नहीं बन सकतीं, यदि व्यक्ति के भीतर आगे बढ़ने का साहस और संकल्प हो।


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