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Mamta Kulkarni : विवादित बयान पड़ा भारी, ममता कुलकर्णी किन्नर अखाड़े से बाहर

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Mamta Kulkarni : बॉलीवुड की पूर्व अभिनेत्री और बाद में साध्वी बनीं ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़े से निष्कासित कर दिया गया है। महामंडलेश्वरों को लेकर दिए गए उनके विवादित बयान के बाद अखाड़े में असंतोष बढ़ गया था, जिसके चलते यह कड़ा निर्णय लिया गया। यह फैसला अखाड़े की आंतरिक बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया।

किन्नर अखाड़े की प्रमुख महामंडलेश्वर डॉ. लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि अब ममता कुलकर्णी का अखाड़े से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि संगठन की गरिमा और संत परंपरा की मर्यादा बनाए रखना सर्वोपरि है। किसी भी व्यक्ति द्वारा सार्वजनिक रूप से ऐसे बयान देना, जिससे धार्मिक समाज की भावनाएं आहत हों, स्वीकार्य नहीं है।

डॉ. त्रिपाठी ने बताया कि अखाड़े में महिला, पुरुष और किन्नर—सभी वर्गों के लोग शामिल हैं और यहां आपसी सम्मान व अनुशासन का विशेष महत्व है। हाल ही में मौनी अमावस्या के अवसर पर हुई कुछ घटनाओं और उसके बाद दिए गए बयानों से अखाड़े की छवि प्रभावित हुई। नेतृत्व का मानना है कि संगठन को विवादों से दूर रखना आवश्यक है, इसलिए यह निर्णय लिया गया।

दरअसल, ममता कुलकर्णी ने एक साक्षात्कार में कहा था कि अधिकांश महामंडलेश्वर और तथाकथित शंकराचार्य “झूठे” हैं और उन्हें “शून्य ज्ञान” है। उन्होंने आरोप लगाया था कि कई धार्मिक पदों पर बैठे लोगों में अहंकार है और वे आध्यात्मिक मूल्यों से भटक चुके हैं। उनके इस बयान के बाद संत समाज में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने नाराजगी जताई।

बयान सामने आने के दो दिन के भीतर ही किन्नर अखाड़े ने अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया। गौरतलब है कि ममता कुलकर्णी ने पिछले वर्ष प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ के दौरान संन्यास ग्रहण किया था। उन्होंने किन्नर अखाड़े से दीक्षा लेकर महामंडलेश्वर स्वामी जय अंबानंद गिरी नाम धारण किया था।

हालांकि, अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। अखाड़े के निर्णय के बाद वे न तो महामंडलेश्वर रहीं और न ही किन्नर अखाड़े की सदस्य। इस घटनाक्रम ने धार्मिक और सामाजिक हलकों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है, जिसमें संत परंपरा, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और संगठनात्मक अनुशासन जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से उभरकर सामने आ रहे हैं।


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